ख़्वाहिशें
ख्वाहिशों का मिला था, दुनियादारी का भी झमेला था, कुछ करने की आश थी, बेचैनियाँ भी पास थी.. डर के साये थे, खुले आसमान तले उड़ने आए थे। हकीकत कुछ अलग थी, सपनों से थोड़ी similar थी.. थोड़ा सा था confusion, नहीं निकल रहा था conclusion.. मंजिल तो पास थी पर उस तक पहुंचने का नहीं था कोई solution !